होशियार बिटिया

होशियार बिटिया

एक बार, एक परिवार में ‘प्रिया’ नाम की छोटी सी लड़की रहती थी। वह अपने माता-पिता के साथ रहती थी। प्रिया अपने माता-पिता की लाड़ली बेटी थी। पिताजी प्रिया को प्यार से बिटिया बुलाते थे।
प्रिया को पढ़ने लिखने का बहुत शोक था। वह प्रतिदिन स्कूल जाति और मन लगाकर पढ़ाई करती। वह महज़ दूसरी कक्षा में थी, पर बहुत समझदार और होशियार थी।

एक दिन कक्षा में अध्यापक बच्चों को घड़ी में समय देखना तथा मिनट और सेकंड का हिसाब सिखा रहे थे। सबकुछ सिखाने के बाद अध्यापक ने एक सवाल पूछा,

“एक हवाई जहाज एक जगह से दूसरी जगह 1घंटे 20 मिनट में पहुंचता है और 80 मिनट में वापस लौटता है, एसा क्यूं ?”

बच्चे अभी अभी नौसिखे थे, वह थोड़ा सा भ्रमित हो गए और सोचने लगे। इतने में आवाज आती है प्रिया की। प्रिया अपने अध्यापक के सवाल को समझ जाति है और उत्तर देने के लिए अनुमति मांगती है। प्रिया को देख अध्यापक समझ जाते हैं कि उसे सवाल का उत्तर मिल गया है। वह प्रिया से उत्तर पूछते हैं और प्रिया बताती है, “1 घंटे में 60 मिनट होते हैं और हवाई जहाज को 1घंटा 20 मिनट लगता है यानी 20 मिनट ज्यादा यदि हम 60 मिनट और 20 मिनट को जोडे़ तो 80 मिनट होते हैं। इतना ही समय हवाई जहाज को आने में लग रहा है। यानी हवाई जहाज 80 मिनट में जा रहा है और 80 मिनट में ही वापस लौट रहा है।”
अध्यापक प्रिया के उत्तर से बहुत खुश हुए और इसी खुशी में उन्होंने प्रिया को अपना बेहद कीमती ‘पैन’ दिया। वह ‘पैन’ किसी आशीर्वाद से कम नहीं था।
अध्यापक को पूरा भरोसा था कि प्रिया आगे पढ़ लिखकर अपने मां-बाप का नाम रोशन करेगी।

“बेटियां हमारे परिवार की शान होतीं हैं, उन्हें भी पढ़ने लिखने, आगे बढ़ने, सपने देखने और उनको पूरा करने का हक है।”

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